चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में व्याख्यानमाला कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
“जीवन जगत का एक आर्य सत्य – संस्कृति जोड़ती है और राजनीति तोड़ती है।। नवजागरण साहित्य की समानता राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता की प्रमुख कड़ी है।”
यह विचार डॉ. विजयदत्त शर्मा (हरियाणा साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक) ने चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के सौजन्य से आयोजित विस्तृत व्याख्यानमाला कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने भारतीय साहित्य की अवधारणा, स्वरूप एवं महत्ता पर विचार प्रकट किए ।
प्रो. नरेश मिश्र ने हिंदी भाषा की सैद्धांतिक व व्यावहारिक स्तिथि को स्पष्ट करते हुए हिन्दी की अपेक्षा और महत्ता पर प्रकाश डाला।
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